नरेंद्र मोदी को कृष्ण और विष्णु का अवतार मानने वाले
वो अर्से तक एक खास हिंदुत्व का चेहरा बने रहे. अपनी शोला बयानी से सुर्खियां भी बटोरीं. लेकिन जब राजस्थान में सत्तारूढ़ बीजेपी चुनाव मैदान में उतरी तो विधायक ज्ञान देव आहूजा को पार्टी ने उम्मीदवार बनाने से इंकार कर दिया. ज्ञान देव आहूजा उस वक़्त भी विवादों में रहे थे जब उन्होंने कहा था कि जेएनयू परिसर से रोज़ाना शराब की दो हज़ार बोतलें और तीन हज़ार कंडोम बरामद होते हैं. अब आहूजा जयपुर में सांगानेर सीट से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे है. आहूजा कहते हैं, ''मुझे इस पर दुःख नहीं हुआ. मगर मैं पार्टी के इस फ़ैसले से हैरान ज़रूर हूँ.'' तनी हुई भृकुटि, घनी काली लम्बी मूंछ और गले में केसरिया दुपट्टा डाले रहने वाले आहूजा अलवर ज़िले में रामगढ़ से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. मगर बीजेपी चौथी बार उन्हें मौका देने के लिए तैयार नहीं हुई. आहूजा की नज़र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कृष्ण स्वरूप और विष्णु का अवतार हैं. पर उनके ये आराध्य अपने इस श्रद्धालु को पार्टी का टिकट नहीं दिलवा पाए. मैं गौरक्षा के लिए हिमालय की दीवार था' अभी आहूजा थोड़ा सम्भल कर बोलते हैं. व...